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Wednesday, March 22, 2023
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    हरियाणा के हजारों युवाओं को मिलेगा इस नई नीति का लाभ, स्टार्टअप करना हुआ आसान

    हरियाणा सरकार ने राज्य में स्टार्टअप्स स्थापित करने को सुगम बनाने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया है। हरियाणा को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य ने व्यापक नीतिगत सुधार किए हैं।  भारत के 101 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स (New Startup Policy implemented in Haryana) में से कम से कम 14 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स (कम से कम 1 बिलियन यूएस डॉलर वैल्यूएशन के) हरियाणा के माध्यम से स्थापित हैं। हरियाणा सरकार ऐसे युवा उद्यमियों को एक मजबूत नीति पारिस्थितिकी तंत्र, मजबूत बुनियादी ढांचा और उदार नियामक मानदंड प्रदान करके उनकी क्षमता को गति देने की इच्छुक है।

    इस नीति के माध्यम से, राज्य सरकार का उद्देश्य हरियाणा में जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना और उसका पोषण करना है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग, हरियाणा द्वारा तैयार की गई एक नई हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 को मंजूरी दी गई।

    अब उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई भी स्टार्टअप इकाई, इसके निगमन/पंजीकरण की तारीख से 10 साल की अवधि तक और जिसका वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे हरियाणा में इस नई नीति के तहत प्रमुख राजकोषीय और गैर-राजकोषीय लाभ लेने के लिए पात्र बन जाएंगे।

    इसके अलावा, DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य स्टार्टअप जिनका पंजीकृत कार्यालय देश में है या हरियाणा के बाहर भी है और जब तक वे हरियाणा में संचालित सरकारी स्वामित्व वाले/समर्थित इन्क्यूबेटरों के माध्यम से काम कर रहे हैं, वे नई नीति के तहत केवल गैर-राजकोषीय लाभों का लाभ उठाने के लिए पात्र होंगे।

    इन लाभों में सब्सिडाइज्ड इनक्यूबेशन स्पेस, हरियाणा सरकार की निविदाओं में भागीदारी के लिए उदार मानदंड, मेंटरशिप कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य स्टार्टअप विशिष्ट कार्यक्रम शामिल हैं।

    वर्तमान में, 3910 हरियाणा स्थित स्टार्टअप्स को 15 जून, 2022 तक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। इस संशोधित नीति के कार्यान्वयन और अन्य संस्थागत गतिविधियों की निगरानी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग में एक स्टार्टअप हरियाणा प्रकोष्ठ की स्थापना की जा रही है।

    यह अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में (नीति अवधि के भीतर) हरियाणा में कम से कम 5000 नए स्टार्टअप स्थापित किए जाएंगे, जो 75000 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेंगे।

    नई स्टार्टअप नीति के तहत कुछ प्रमुख प्रोत्साहन/लाभ इस प्रकार हैं:

    स्टार्टअप्स को वित्तीय प्रोत्साहन:

    i) नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति: 7 वर्षों के लिए 50 प्रतिशत एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति।

    ii) लीज रेंटल सब्सिडी: स्टार्टअप्स के लिए 5 लाख रुपये तक लीज रेंटल सब्सिडी की प्रतिपूर्ति होगी।

    iii) स्टार्टअप के लिए सीड फंडिंग: ‘ए’ श्रेणी के ब्लॉक में 100 स्टार्टअप, ‘बी’ श्रेणी के ब्लॉक में 250 स्टार्टअप, ‘सी’ श्रेणी के ब्लॉक में 750 स्टार्टअप और ‘डी’ में 1000 स्टार्टअप के लिए प्रति स्टार्टअप 10 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग की जाएगी।

    iv) पेटेंट लागत: स्टार्टअप्स को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पेटेंट पंजीकरण के लिए वास्तविक व्यय की 100 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जाएगी जो अधिकतम 25 लाख रुपये होगी।

    v) क्लाउड स्टोरेज के लिए प्रतिपूर्ति: हरियाणा स्थित डेटा केंद्रों पर क्लाउड कंप्यूटिंग / स्टोरेज के लिए किए गए खर्च की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी जो 5 वर्ष की अवधि के लिए प्रति स्टार्टअप प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये तक होगी।

    vi) एक्सलरेशन कार्यक्रमों में सहायता: राष्ट्रीय एक्सलरेशन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए स्टार्टअप को 2.5 लाख रुपये और अंतर्राष्ट्रीय एक्सलरेशन कार्यक्रमों के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

    इन्क्यूबेटरों को वित्तीय प्रोत्साहन:

    i) पूंजीगत सब्सिडी: इनक्यूबेटरों की स्थापना के लिए गवर्मेंट होस्ट इंस्टीट्यूट को 2 करोड़ रुपये तक तथा निजी होस्ट इंस्टीट्यूट को 1 करोड़ रुपये तक की पूंजी अनुदान दिया जाएगा।

    ii) सलाह सहायता: परामर्श सहायता के लिए सरकार के स्वामित्व/समर्थित/प्रायोजित इन्क्यूबेटरों को 2.5 लाख रुपये तक प्रति इन्क्यूबेटर की वित्तीय सहायता दी जाएगी जो प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख रुपये तक होगी।

    iii) रेंटल चार्ज पर प्रतिपूर्ति: इनक्यूबेटर द्वारा लीज रेंट के रूप में किये गये भुगतान के लिए तीन साल की अवधि के लिए 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

    iv)  स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण प्रतिपूर्ति: भूमि/कार्यालय स्थान/आईटी भवन की खरीद/पट्टे पर स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी।

    v) मेले/प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए सहायता: उद्योग संघों/इनक्यूबेटरों/सरकारी विभागों ने स्टार्टअप्स के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मेले/प्रदर्शनी में किया या इस तरह के मेले/प्रदर्शनी/सेमिनारों के आयोजन के लिए वास्तविक आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जो अधिकतम 50 लाख रुपये तक होगी।

    vi)  स्टार्टअप प्रतियोगिता सहायता: इनक्यूबेटर को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में स्टार्टअप प्रतियोगिता उत्सव के आयोजन के लिए प्रति आयोजन 20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

    vii)  बिजली शुल्क में छूट: इनक्यूबेटर को ‘डी’ श्रेणी के ब्लॉक में 12 साल के लिए व   ‘सी’ श्रेणी के ब्लॉक में 10 साल और ‘बी’ श्रेणी के ब्लॉक में 7 साल के लिए बिजली शुल्क में शत-प्रतिशत छूट के पात्र होंगे।

    राज्य सरकार ने स्टार्टअप हितधारकों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करने के लिए नई हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 में कई नए प्रोत्साहन भी जोड़े हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार से हैं:

    i) नया स्टार्टअप वेयरहाउस/इनोवेशन कैंपस: पंचकूला, हिसार और अन्य संभावित स्थानों पर आईटी स्टार्टअप वेयरहाऊस की स्थापना हेतु पूंजीगत व्यय के लिए 4 करोड़ रुपये तथा तीन साल के आवर्ती व्यय के लिए एक करोड़ रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

    ii) नया मोबाइल एप्लिकेशन विकास केंद्र: पंचकूला, हिसार और ‘सी’ और ‘डी’ ब्लॉक के अन्य संभावित स्थानों पर नया मोबाइल एप्लिकेशन विकास केंद्र की स्थापना के लिए पूंजीगत व्यय के लिए 4 करोड़ रुपये तथा तीन साल के लिए आवर्ती व्यय के लिए एक करोड़ रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

    iii) विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में इनक्यूबेशन केंद्र:  इन्क्यूबेशन सेंटर बनाने के लिए प्रति इनक्यूबेटर के लिए 50 लाख रुपये तथा पांच साल के लिए आवर्ती व्यय के लिए 20 लाख रुपये वार्षिक रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

    विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में मौजूदा इन्क्यूबेटरों को उनकी सुविधाओं के उन्नयन के लिए प्रति इनक्यूबेटर 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

    इससे पहले इनक्यूबेशन केंद्र में स्टार्टअप लाभ प्राप्त करने के लिए केवल एक वर्ष की अवधि के लिए पात्र थे। अब नई स्टार्टअप नीति में ऐसे स्टार्टअप सब्सिडाइज्ड दरों पर स्पेस, प्लग एंड प्ले सुविधाओं के लिए तीन वर्ष के लिए लाभ ले सकते हैं।

    नई नीति अब पहले के 8 अलग-अलग कानूनों के बजाय 14 अलग-अलग कानूनों के तहत स्व-प्रमाणन रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति देकर स्टार्टअप्स को और सुविधा प्रदान करती है। इससे स्टार्टअप्स के लिए कारोबार करने में आसानी होगी।

    राज्य सरकार हर छह महीने में हरियाणा के 22 जिलों में विशिष्ट उद्यमिता विकास कार्यक्रम भी आयोजित करेगी ताकि नई नीति के तहत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में उनके विकास के अवसरों और क्षमता के बारे में इच्छुक इनोवेटर्स/उद्यमियों और स्कूल/कॉलेज के विद्यर्थियों के बीच और जागरूकता पैदा की जा सके।

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