14.1 C
Delhi
Saturday, February 4, 2023
More

    Latest Posts

    77 साल की दादी जिन्होंने बुढापे में ही शुरू किया गुजराती खाने का स्टार्टअप,मुनाफे के साथ 5 लोगो को भी देती है रोज़गार

    दोस्तों परेशानियां किसके जीवन में नहीं आती हैं। यूं मान लीजिए कि जिसने जमीन पर कदम रख दिया वही परेशानियों से घिर गया। भगवान हो या फिर इंसान हर कोई परेशानियों से जूझता रहता है। कुछ लोग हैं जो परेशानियों से परेशान होते हैं। और कुछ लोग हैं जो परेशानियों से सीखते हैं। कुछ लोग हैं जो परेशानियों से सिर्फ जूझते हैं। अब हम एक ऐसी मिसाल आपके सामने इस खबर के माध्यम से पेश करने जा रहे हैं।

    जिस मिसाल को सुनने के बाद आपके मन में भी बहुत जोश उबाल मारेगा। जब हम युवा होते हैं, तो हमारे पास बहुत ऑप्शन होते हैं। भागने के दौड़ने के कुछ कर गुजरने के। लेकिन सोचिए जब हम बुजुर्ग होते हैं अपने उस पड़ाव पर होते हैं कि कहीं भागदौड़ नहीं सकते।

    तो सोचिए उस वक्त भी अगर हमारे अंदर जोश जुनून हो तो कितनी बड़ी बात होती है। और दादी, जी हाँ 77 साल की दादी की मिसाल दुनिया दे रही है और दुनिया देख भी रही है। दादी ने जो कारनामा कर दिया उस कारनामे से ना सिर्फ अपना पेट भर रही हैं बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने का काम कर रही हैं।

    इनके जुनून को देखकर हर कोई हर्षित है। बुढ़ापे में जाकर लोग टूट जाया करते हैं। रिटायरमेंट की बात करते हैं।जीवन में संघर्ष की कहानी आती है। बहुत कम लोग होते हैं जो सुकून से अपना पूरा जीवन जी जाते हैं।

    लेकिन बहुत ज्यादा इस धरती के ऐसे लोग हैं जो अपनी जिंदगी को संघर्ष के साथ बिताते हैं। उनमें से एक यह दादी भी हैं। दादी जीवन को जब बताती हैं तो आंखें उनकी नाम हो जाती हैं।

    दादी ने अपने जीवन में बहुत ज्यादा संघर्ष किया है।, और देखा है। बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। दोस्तों जो आया है वह जरूर जाएगा। जो जो पैदा हुआ है वह इस जमी को छोड़कर भी जाएगा, लेकिन एक के बाद एक, एक के बाद एक कुछ ऐसी स्थिति पैदा हो जाएगी इंसान उभर ही ना पाए।

    इंसान उभर ना पाए तो ऐसी स्थिति में बहुत ही ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक समय था जब दादी पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन उसके बावजूद भी दादी ने हार नहीं मानी मुंबई की रहने वाली उर्मिला जमुनादास दादी जिन्होंने एक मिसाल कायम की है। जिन्होंने गुजराती फूड स्टार्टअप किया।

    देखते ही देखते दादी चमक गईं। आज के दिन दादी कई लोगों को नौकरी भी देती हैं। दादी के साथ उनका पोता हर्ष। हर्ष जिसने एमबीए किया और उसके बाद किसी कंपनी के साथ मिलकर काम करता रहा। और उसके बाद उसने अपनी आर्ट गैलरी की गिफ्ट की शॉप खोली।

    उसके बाद उसका धंधा खूब चलता रहा। लेकिन एक समय आया कि वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसका एक्सीडेंट हुआ और उसने अपने ऊपर के हॉठ को गवा दिया। अब हर्ष को दादी ने देखा, ख़्याल रखा और उसके ठीक होने पर उसे खूब समझाया।

    और दादी ने उसे बोला कि बिजनेस बंद होने से और परेशानी होने से ज़िंदगी नहीं रुकती है, हौसला रखना है, अब बात को हर्ष झट से समझ गया। दादी पहले घरेलू अचार बनाया करती थी। लॉकडाउन पिछले साल लगा था, और उसने सोचा क्यों ना अब इस अचार को दुनिया के घर-घर पहुंचाया जाए। हर्ष ने वही काम शुरू किया। उसके बाद धीरे-धीरे काम पटरी पर आया। उसके बाद दादी ने और भी गुजराती फूड्स बनाने शुरू कर दिए।

    कुकीज और सैंडविच और पोहा और सारे गुजराती फूड बनाने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे दादी का काम चरम पर बढ़ता गया। अब यहां पर लोगों की जरूरत भी पड़ी तो दादी ने और हर्ष ने मिलकर कुछ लोगों को रोजगार पर रखा।

    आज की डेट में दादी का काम बहुत जबरदस्त परफॉर्म कर रहा है। और इस काम के बलबूते दादी और उनका पोता हर्ष चमक रहे हैं। और यह चमक दादी की वजह से है, क्योंकि 77 साल की उम्र होने के बावजूद भी दादी ने कभी हार नहीं मानी।

    इतनी सारी घटनाओं विडंबना होने के बावजूद भी दादी ने कभी हार नहीं मानी। ख़ुद को चमका दिया है। तो दोस्तों अगर हमारे बड़े बुजुर्ग अगर इस तरीके की कोशिशें करते हैं तो यकीन मानिए हम बच्चों का हौसला बढ़ता ही है। और हम आगे लगातार चमकते सितारे की तरह बढ़ते जाते हैं।

    Latest Posts

    Don't Miss

    Stay in touch

    To be updated with all the latest news, offers and special announcements.