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Thursday, December 8, 2022
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    घट जाएगा NCR का 24% हिस्सा, हरियाणा के यह जिले होंगे बाहर, जानें क्या है सरकार की प्लानिंग

    जल्दी ही दिल्ली एनसीआर का नक्शा (map of Delhi NCR is about to change) बदलने वाला है। हरियाणा ने अपने कुछ जिलों को एनसीआर से बाहर (Some districts of Haryana out of NCR) करने की पूरी तैयारी कर ली है। अगर सरकार यह प्रस्ताव मंजूर करती है तो एनसीआर का मौजूदा दायरा 24 प्रतिशत तक (The existing coverage of NCR will be reduced to 24%) घट जाएगा। हरियाणा की खट्टर सरकार ने प्रदेश के पांच जिलों को एनसीआर से बाहर करने में जुटी है। इसका एक प्रस्ताव सरकार की तरफ से NCR Planning Board के समक्ष रखा गया है।

    हरियाणा सरकार जिन जिलों को बाहर करने वाली है उनमें महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, करनाल और जींद शामिल है। इसके अलावा पानीपत और रोहतक जिले की तीन तहसीलों को भी एनसीआर से बाहर किया जाएगा।

    बता दें कि अभी तक हरियाणा सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव पर एनसीआर में शामिल तीन अन्य राज्यों की तरफ से कोई आपत्ति सामने नहीं आई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि हरियाणा सरकार के इस प्रस्ताव के पारित जल्द ही और बिना किसी रुकावट के पास हो जायेगा।

    पिछली सरकारों के विपरीत फैसला

    हरियाणा की वर्तमान सरकार का यह फैसला पिछली सरकारों के बिलकुल विपरीत है। क्योंकि पिछली सरकार का जोर केवल प्रदेश के जिलों को NCR में शामिल करने पर होता था। आंकड़ों के अनुसार, रिजनल प्लान 2021 में एनसीआर में हरियाणा का एरिया 13,413 वर्ग किलोमीटर था।

    अन्य पांच जिले शामिल करने के बाद यह क्षेत्र बढ़कर 25,327 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इस दौरान महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी-दादरी, करनाल और जींद को शामिल किया गया था। इसी तरह, यूपी के मुजफ्फरनगर और शामली के साथ ही राजस्थान के भरतपुर को भी एनसीआर में शामिल किया गया था।

    पहली बार एक साथ दो प्लान पर विचार

    कहा जा रहा है कि मंगलवार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड रीजनल प्लान 2041 के दो सेट पर विचार करेगा। यह पहली बार होगा जब दो प्लानों पर एक साथ विचार किया जाएगा। एक प्लान एनसीआर के मौजूदा क्षेत्र (55,144 वर्ग किलोमीटर) पर आधारित होगा। तो वहीं दूसरा एनसीआर के कम हुए क्षेत्र (42, 083 वर्ग किलोमीटर) पर आधारित होगा।

    विकास की जगह होती है राजनीति

    मिली जानकारी के अनुसार बोर्ड दोनों प्रस्तावों को भी मंजूरी दे सकता है। अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि पहले एनसीआर में जिलों को शामिल कराने पर जोर होता था। लेकिन इसके पीछे क्षेत्र के विकास से अधिक वजह राजनीतिक होती थी।

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