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Monday, December 5, 2022
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    अंटार्टिका में बजी खतरे की घंटी, वैज्ञानिक हाई अलर्ट पर

    मुसीबतों का पहाड़ साल 2020 से टूटना शुरू हुआ है। जो अभी तक जारी है, क्योंकि कोरोना कोई बीमारी नहीं बल्कि महामारी से जिससे लड़ने की कोशिश पूरी दुनिया कर रही है। अब इसी कोशिश को करते-करते तरह-तरह की मुसीबतें भी निकलकर सामने आती जा रही हैं। कोरोना की पहली लहर ने पहले तो लोगों को डराया, फिर दूसरी लहर ने लोगों को मौत के मुंह में डाल दिया, उसके बाद ब्लैक फंगस जैसी महामारी निकलकर सामने आ रही है।

    कुल मिलाकर हम इन तमाम बीमारियों से लड़ भी नहीं पा रहे हैं कि एक-एक कर कई अन्य शत्रु लगातार सामने आते जा रहे हैं। इसी बात तो लेकर वैज्ञानिक भी बहुत परेशान हैं। अब आखिर हुआ क्या, कैसे और क्यों परेशान हुए हैं वैज्ञानिक, इस बारे में अब हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं।

    ग्लोबल वार्मिंग से जहां अंटार्कटिका की बर्फ तेज रफ्तार से गर्म हो रही है। उसकी वजह से बर्फ के विशालकाय आइसबर्ग पिघले जा रहे रहे हैं। ऐसे में एक हिमखंड (आइसबर्ग) अंटार्कटिका में ग्लेशियरों के पीछे हटने से टूट गया है। सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों के मुताबिक यह दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड है, जिसका आकार स्पेनिश द्वीप मालोर्का के बराबर बताया जा रहा है।

    नेशनल स्नोै एंड आइस डेटा सेंटर के अनुसार इस आइसबर्ग से अलग होने से समुद्र के जलस्तेर में इजाफा नहीं होगा, लेकिन अप्रत्यसक्ष रूप से जलस्तरर बढ़ सकता है। बता दें कि अंटार्कटिका की बर्फ की चादर बाकियों की तुलना में तेजी से गर्म हो रही है, जिससे बर्फ और बर्फ के आवरण पिघल रहे हैं और साथ ही ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं, खासकर वेडेल सागर के आसपास।

    जैसे ही ग्लेशियर पीछे हटते हैं बर्फ के टुकड़े टूट जाते हैं और तब तक तैरते रहते हैं जब तक कि वे अलग नहीं हो जाते या फिर जमीन से टकरा नहीं जाते।

    बतादें यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने कहा कि आइसबर्ग ए-76 अंटार्कटिका में रोने आइस शेल्फ के पश्चिमी हिस्से से टूटकर निकल गया है और अब वेडेल सागर पर तैर रहा है। यह लगभग 170 किलोमीटर (105 मील) लंबा और 25 किलोमीटर (15 मील) चौड़ा है।

    जो यह न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड से बड़ा है और प्यूर्टो रिको के आकार से आधा है।वहीं इस पर वैज्ञानिकों का मानना है कि ए-76 जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं बल्कि प्राकृतिक वजहों से टूटा है।

    तो कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि साल 2021 पता नहीं अब और क्या कहर बरपायेगा। ना जाने और कितनों की जान लेकर जाएगा। लेकिन हाँ चाहे जो हो हमें धैर्य ज़रूर रखना होगा, तभी हम अपना और अपनों का ख़्याल रख पाएंगे।

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