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Saturday, April 20, 2024
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    6 साल में 12 बार लगी नौकरी लेकिन फिर भी नही मानी हार, हासिल किया IPS का पद

    कड़ी संघर्ष के बाद सफलता हासिल कर अफसर बनने वाले कई शानदार व्यक्तित्व की चर्चा हम कर चुके हैं। इस कड़ी में आज एक ऐसी शख्सियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने 6 साल में 12 परीक्षाएं पास की और आखिरकार बने आईपीएस अफसर। प्रेमसुख डेलू की सफलता का अंदाजा इससे सहज लगाया जा सकता है कि छह साल में ये 12 बार सरकारी नौकरी लग चुके हैं, जबकि सरकारी नौकरियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में एक बार भी चयन होना आसान बात नहीं है।

    गुजरात कैडर के आईपीएस प्रेमसुख डेलू वर्तमान में अमरेली जिले में एएसपी के पद पर तैनात हैं। IPS प्रेमसुख डेलू का जन्म राजस्थान के बीकानेर जिले के छोटे से गांव रासीसर में हुआ था। वह अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।

    उनके पिता एक किसान थे, चूँकि उनके पास इतनी ज्यादा जमीन नहीं थी कि घर का गुजारा मात्र खेती से चल सके। इसलिए, वह ऊंटगाड़ी भी चलाते थे। IPS प्रेमसुख ने गांव के सरकारी स्कूल से दसवीं पास की थी। प्रेमसुख बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे।वह कहते हैं, “भले ही मेरे माता-पिता ने पढ़ाई नहीं की, लेकिन पढ़ाई के प्रति मेरी रुचि देखकर, उन्होंने मुझे हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    उनकी सबसे पहली नौकरी 2010 में, बीकानेर के ही एक गांव में पटवारी के तौर पर लगी। लेकिन, यह मात्र उनके सफर की शुरूआत थी। उसी साल, उन्होंने राजस्थान में ग्राम सेवक के पद की परीक्षा में, राज्य में दूसरा रैंक हासिल किया। उन्होंने असिस्टेंट जेलर के पद की परीक्षा में, पूरे राजस्थान में पहला स्थान प्राप्त किया।

    उन्होंने साल 2011 में बीएड किया और इसके बाद प्राइमरी और सेकण्डरी स्कूल टीचर की परीक्षा भी पास की। कुछ दिन उन्होंने बीकानेर के कतरियासर गांव में बतौर स्कूल शिक्षक भी काम किया।

    इतना सब होने के बाद भी इन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं रोकी और आगे की पढ़ाई को जारी रखी। इसके बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं में तहसीलदार के पद पर उनका चयन हुआ।

    तहसीलदार के पद पर नौकरी करने के साथ-साथ इन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी करतें रहें। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से प्रेमसूख देलू ने यूपीएससी की परीक्षा में दूसरें ही प्रयास में सफलता प्राप्त किया। UPSC की परीक्षा में प्रेमसूख देलू ने हिन्दी माध्यम से 170वां रैंक हासिल किया और उनके लिये एक मिसाल बन गयें जो भाषा के आधार पर किसी की काबिलियत को मापते हैं।

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