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Thursday, December 8, 2022
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    एक पिता का त्याग जो भर देगा आपकी आंखों में आँसू, बच्चो को पढ़ने के लिए उठाता है दिन भर बोझा

    हर माता पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ लिख कर एक अच्छा इंसान बने, ऐसे में माता पिता खूब मेहनत करते है। खासकरके इसमें पिता का अहम रोल होता है। पिता के बिना बच्चों का कोई वजूद नहीं होता। जी हां बच्चे के सपने पूरे करने के लिए एक पिता हर वो मेहनत करता है जिसे उसे करना चाहिए। तो चलिए आज एक ऐसे पिता की कहानी बताने जा रहे है जिसके बारे में सुनते ही आपकी आंखें नम हो जाएंगी।

    दरअसल लाहौर के सलीम काज़मी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक ट्रिप के दौरान किसी कुली के साथ हुई छोटी सी मुलाकात का किस्सा शेयर किया है जो काफी असहाय होने के बाद भी अपने बच्चो की जिंदगी सँवारने के लिए लोगों के बोझ से दबा जा रहा था। लाहौर के रेलवे स्टेशन पर करीब 20 सालों से यूसिफ नामक व्यक्ति अपने बच्चों के लिए कुली का काम कर रहे है।

    परिवार को चलाने के लिए यूसिफ ने अपनी खुशियों की कुर्बानी दे दी। उनके परिवार में 1 बेटा और 2 बेटी है जिसकी जिम्मेदारी यूसिफ अच्छे से निभा रहे है। दिन रात मेहनत करने के बाद बेटे को इंजीनियरिंग  की पढ़ाई करवाई।

    साल 2008 में यूसिफ़ के बेटे ने जिस कॉलेज से इंजीनियरिंग की थी, उसे उसी कॉलेज में लेक्चरार की जॉब मिल गयी। बेटे की नौकरी लगते ही मानों उनके सपने पूरे हो गए। पूरा परिवार मानो खुशी से झूम रहा था।

    बेटे ने पिता की नौकरी भी छुड़वा दी लेकिन शायद इस परिवार को खुशियों पर किसी की नजर लग गयी और एक छोटी सी दुर्घटना में यूसिफ ने अपने बेटे को खो दिया। जिसके बाद पूरा परिवार फिर से टूट गया। अपने परिवार को संभालने के लिए यूसिफ ने फिर से कुली की नौकरी पकड़ ली।

    जिस बेटे की आस में नौकरी छोड़ी उसने फिर से बोझ तले दबा दिया। लेकिन इस बार उनके कंधें भी समान को बोझ नही उठा पा रहे थे। क्योकि उनका एक कंधा पैरालाइज़ हो चुका है। जिससे समान को उठाने में हाथ पैर कांपने लगते थे। लेकिन इसके बावजूद उनका दूसरा उद्देश्य़ अपनी दोनों बेटीयों को काबिल बनाने का था।

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